कंपनी विधि सेटेलमेंट योजना, 2010 से संबंधित प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न
- कंपनी विधि सेटेलमेंट योजना, 2010 (सीएलएसएस) क्या है?
- इस योजना की अवधि क्या है?
- सीएलएसएस, 2010 के तहत क्या लाभ उपलब्ध है?
- किन दस्तावेजों पर सीएलएसएस, 2010 लागू नहीं है?
- यदि किसी कंपनी की पेड-अप पूंजी, कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उपधारा (3) एवं उप धारा (4) में उपबंधित न्यूनतम सीमा से कम हो। क्या ऐसी कंपनी को अपने विलंबित दस्तावेज दायर करने एवं इस योजना का लाभ लेने की अनुमति होगी?
- क्या सीएलएसएस, 2010 के तहत छूट प्राप्त करने हेतु आवेदन करने की कोई समय-सीमा है?
- क्या सीएलएसएस, 2010 के तहत छूट प्राप्त करने हेतु आवेदन करने की कोई शुल्क है?
आसान निकासी योजना, 2010 से संबंधित प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न
- आसान निकासी योजना, 2010 (ईईएस) क्या है?
- इस योजना की अवधि क्या है?
- किन कंपनियों के संबंध में ईईएस, 2010 लागू नहीं है?
- ईईएस, 2010 के तहत नाम हटाने के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है?
- ईईएस, 2010 फार्म दायर करने के लिए क्या कोई शुल्क विहित है?
- ईईएस, 2010 फार्म पर कौन हस्ताक्षर कर सकता है? क्या ईईएस, 2010 फार्म दायर करने हेतु कंपनी के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का डिजीटल हस्ताक्षर अनिवार्य अपेक्षा हैं?
- यदि किसी शेयरधारक को रजिस्ट्रार के पास किसी कंपनी का नाम हटाने पर आपत्ति हो, तो ऐसे मामले में क्या किया जा सकता है?
"कंपनी विधि सेटेलमेंट योजना, 2010" चूककर्ता कंपनियों को देरी से भी दस्तावेज दायर करके एवं भविष्य में नियमित अनुपालनकर्ता बनाकर अपनी चूक में सुधार करने में समर्थ करने हेतु अवसर उपलब्ध कराता है। एमसीए के वेबसाइट पर सूचना एवं घटनाक्रम के तहत अधिनियम, विधेयक एवं नियम शीर्ष में उपलब्ध सामान्य परिपत्र संख्या-1/2010 का संदर्भ लें।
योजना के तहत देर से जमा किए जा रहे दस्तावेजों के लिए कंपनी, कंपनी अधिनियम एवं उसके तहत बनाए गए नियमों के अधीन विहित सांविधिक जमा शुल्क एवं वास्तविक अतिरिक्त शुल्क का 25% अतिरिक्त शुल्क अदा करेगी अर्थात् वास्तविक अतिरिक्त शुल्क के 75 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, योजना बंद होने के पश्चात्, कंपनी योजना के तहत देर से जमा किए जा रहे दस्तावेजों के संबंध में छूट हेतु आवेदन कर सकती है एवं रजिस्ट्रार समाधान हो जाने पर योजना में दायर दस्तावेजों के संबंध में अभियोजन से छूट प्रदान कर सकता है।
छूट प्रदान करने के पश्चात संबंधित रजिस्ट्रार संबंधित न्यायालय में लंबित अभियोजन, यदि कोई हो, वापस ले लेगा।
इसके अतिरिक्त, योजना बंद होने के पश्चात्, कंपनी योजना के तहत देर से जमा किए जा रहे दस्तावेजों के संबंध में छूट हेतु आवेदन कर सकती है एवं रजिस्ट्रार समाधान हो जाने पर योजना में दायर दस्तावेजों के संबंध में अभियोजन से छूट प्रदान कर सकता है।
छूट प्रदान करने के पश्चात संबंधित रजिस्ट्रार संबंधित न्यायालय में लंबित अभियोजन, यदि कोई हो, वापस ले लेगा।
सीएलएसएस, 2010 निम्नलिखित पर लागू नहीं होगा:-
- निगमन हेतु दस्तावेज दायर करने पर; अथवा
- भारत में व्यवसाय स्थल की स्थापना हेतु दस्तावेज दायर करने पर; अथवा
- जहां कंपनी विधि बोर्ड या केन्द्रीय सरकार या न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी से कंपनी अधिनियम, 1956 के उपबंधों के तहत विलंब हेतु माफी या पूर्व अनुमति के लिए विशेष आदेश के लिए दस्तावेज दायर करना हो।
- वह कंपनियां जिनके विरूद्ध कंपनी रजिस्ट्रारों द्वारा अधिनियम की धारा 560 की उपधारा (5) के तहत कार्यवाही प्रारंभ की गई है
हां, कंपनी योजना के लाभ उठा सकती है। तथापि, ऐसी कंपनी पहले योजना के तहत न्यूनतम सीमा तक पेड-अप पूंजी बढाने हेतु दस्तावेज दायर करेगी एवं उसके पश्चात् देर से जमा किए जाने वाले अन्य दस्तावेज दायर करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
हां, योजना बंद होने एवं सीएलएसएस, 2010 के दौरान दायर विलंबित दस्तावेजों को फाइल पर लेने या कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा अभिलेख दर्ज करने या अनुमोदन करने, जैसा भी मामला हो, के पश्चात आवेदन किया जा सकता है, किन्तु योजना बंद होने की तिथि से 6 महीने बीत जाने के बाद आवेदन नहीं किया जा सकता है।
"आसान निकासी योजना, 2010" निष्क्रिय कंपनियों को कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 560 के तहत रजिस्टर से अपना नाम हटाने का अवसर प्रदान करता है।
इस योजना में अन्य बातों के अतिरिक्त वे कंपनियां शामिल नहीं है जो आगे दिए गए सूची में से हो: सूचीबद्ध कंपनियां, धारा 25 कंपनियां, लुप्त कंपनियां, जांचाधीन कंपनियां, वैसी कंपनियां जिनके विरूद्ध न्यायालय में असमाधेय अपराध हेतु अभियोजन चल रहा हो, वैसी कंपनियां जिनके पास बड़ी मात्रा में जमा हो या प्रतिभूति ऋण या बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों या किसी अन्य सरकारी विभाग आदि को देय हो या जिनमें प्रबंधकीय विवाद हो या कंपनियां जिनके संबंध में न्यायालय या सीएलबी या केन्द्र सरकार या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा दस्तावेज दायर करने पर रोक लगाई गई हो।
एमसीए के वेबसाइट पर सूचना एवं घटनाक्रम के तहत अधिनियम, विधेयक एवं नियम शीर्ष में उपलब्ध सामान्य परिपत्र संख्या-2/2010 का संदर्भ लें।
एमसीए के वेबसाइट पर सूचना एवं घटनाक्रम के तहत अधिनियम, विधेयक एवं नियम शीर्ष में उपलब्ध सामान्य परिपत्र संख्या-2/2010 का संदर्भ लें।
यदि एमसीए-21 प्रणाली में कंपनी का सक्रिय हस्ताक्षरकर्ता विद्यमान है तो फार्म को कंपनी के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा डिजीटल रूप में हस्ताक्षरित होना अनिवार्य है।
यदि एमसीए-21 प्रणाली में ऐसा कोई हस्ताक्षरकर्ता विद्यमान नहीं है तो विहित रूप से भरे गए फार्म की भौतिक प्रति पर कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा प्राधिकृत निदेशक को हस्ताक्षर करना होगा एवं इसे फार्म के साथ संलग्न करना होगा।
सभी मामलों में पेशारत व्यावसायिक (जैसे सीए/सीएस/सीडब्ल्यूए) द्वारा प्रमाण-पत्र अनिवार्य है।
ईईएस, 2010 के तहत दायर आवेदनों की सूची वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी अंशधारक को किसी कंपनी का नाम हटाए जाने पर कोई आपत्ति है तो वह कंपनी द्वारा ईईएस, 2010 फार्म जमा करने की तिथि के 30 दिनों के भीतर संबंधित कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय के पास अपनी आपत्ति दर्ज कर सकता है।