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आसान निकासी योजना, 2011 से संबंधित प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न



"आसान निकासी योजना, 2011" निष्क्रिय कंपनियों को कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 560 के तहत रजिस्टर से अपना नाम हटाने का अवसर प्रदान करता है।
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यह योजना 1 जनवरी, 2011 से लागू होगी एवं 30 अप्रैल, 2011 तक प्रभावी रहेगी।
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इस योजना में अन्य बातों के अतिरिक्त वे कंपनियां शामिल नहीं है जो आगे दिए गए सूची में से हो: सूचीबद्ध कंपनियां, कंपनियां जिन्हें असूचीबद्ध कर दिया गया है, धारा 25 कंपनियां, लुप्त कंपनियां, जांचाधीन कंपनियां, वैसी कंपनियां जिनके विरूद्ध न्यायालय में असमाधेय अपराध हेतु अभियोजन चल रहा हो, वैसी कंपनियां जिनके पास बड़ी मात्रा में जमा हो या प्रतिभूति ऋण या बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों या किसी अन्य सरकारी विभाग आदि को देय हो या जिनमें प्रबंधकीय विवाद हो या कंपनियां जिनके संबंध में न्यायालय या सीएलबी या केन्द्र सरकार या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा दस्तावेज दायर करने पर रोक लगाई गई हो।

एमसीए के वेबसाइट पर सूचना एवं घटनाक्रम के तहत अधिनियम, विधेयक एवं नियम शीर्ष में उपलब्ध सामान्य परिपत्र संख्या-6/2010 का संदर्भ लें।
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रजिस्टर से नाम हटाने की इच्छुक कंपनी विहित फार्म ईईएस, 2011 में रजिस्ट्रार के पास आवेदन करेगी।

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हां, आवेदक को ईईएस, 2011 के विहित प्रपत्र में आवेदन के साथ 3000 रुपए का विहित शुल्क भी जमा करना होगा।
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यदि एमसीए-21 प्रणाली में कंपनी का सक्रिय हस्ताक्षरकर्ता विद्यमान है तो फार्म को कंपनी के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा डिजीटल रूप में हस्ताक्षरित होना अनिवार्य है।
यदि एमसीए-21 प्रणाली में ऐसा कोई हस्ताक्षरकर्ता विद्यमान नहीं है तो विहित रूप से भरे गए फार्म की भौतिक प्रति पर कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा प्राधिकृत निदेशक को हस्ताक्षर करना होगा एवं इसे फार्म के साथ संलग्न करना होगा।
सभी मामलों में पेशारत व्यावसायिक (जैसे सीए/सीएस/सीडब्ल्यूए) द्वारा प्रमाण-पत्र अनिवार्य है।
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ईईएस, 2011 के तहत दायर आवेदनों की सूची वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी अंशधारक को किसी कंपनी का नाम हटाए जाने पर कोई आपत्ति है तो वह कंपनी द्वारा ईईएस, 2011 फार्म जमा करने की तिथि के 30 दिनों के भीतर संबंधित कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय के पास अपनी आपत्ति दर्ज कर सकता है।
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