त्वरित निकासी मोड से संबंधित प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न
- • त्वरित निकासी मोड (एफटीई) क्या हैं?
- • इन मार्ग निर्देशों के कार्यान्वयन की तिथि क्या है?
- • एफटीई के अधीन आवेदन करने के लिए प्रमुख मानक क्या है?
- • क्या कोई निष्क्रिय कंपनी एफटीई के तहत आवेदन कर सकती हैं?
- • क्या चूककर्ता के रूप में पहचानी गई कोई कंपनी एफटीई के तहत आवेदन कर सकती हैं?
- • किन कंपनियों पर एफटीई लागू नहीं हैं?
- • एफटीई के अधीन नाम हटाने हेतु आवेदन करने की प्रक्रिया क्या हैं?
- • क्या एफटीई फार्म दायर करने हेतु कोई शुल्क विहित हैं?
- • एफटीई फार्म पर कौन हस्ताक्षर कर सकता है? क्या एफटीई फार्म दायर करने हेतु कंपनी के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का डिजीटल हस्ताक्षर अनिवार्य अपेक्षा है?
- • यदि कंपनी एवं इसके निदेशकों के विरूद्ध अभियोजन लंबित है तो कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाएं?
- • विदेशी नागरिक अपने क्षतिपूर्ति बांड एवं शपथ-पत्र को कैसे अभिप्रमाणित किया जा सकता हैं?
- • यदि किसी शेयरधारक को रजिस्ट्रार के पास किसी कंपनी का नाम हटाने पर आपत्ति हो, तो ऐसे मामले में क्या किया जा सकता है?
मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 560 के अधीन निष्क्रिय कंपनियों को अपना नाम रजिस्टर से समयबद्ध तरीके से हटाने के लिए अवसर प्रदान करने हेतु "त्वरित निकासी (एफटीई) मोड" के लिए मार्ग-निर्देश जारी किए हैं।
ये मार्ग-निर्देश 3 जुलाई, 2011 से कार्यान्वित होंगे।
दो मुख्य मानक हैं:-
- • एफटीई के तहत आवेदन करने वाली कंपनी की कोई संपत्ति या देयता नहीं हो।
- • कंपनी ने निगमन की तारीख से कोई व्यवसाय गतिविधि या कार्य प्रचालन प्रारंभ नहीं किया हो या इसके द्वारा अंतिम व्यवसाय गतिविधि या प्रचालन के कम से कम एक वर्ष से बीत चुका हों।
हां, यदि किसी कंपनी की पहचान कारपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा निष्क्रिय कंपनी के रूप में की गई है तो वह एफटीई के तहत आवेदन कर सकता है। ऐसी कंपनियों के सामान्यीकरण के लिए फार्म-61 दायर करना अनिवार्य नही है।
जिस कंपनी ने वित्त वर्ष 2006-07, 2007-08, 2008-09 एवं 2009-10 हेतु सांविधिक दस्तावेज जैसे तुलन-पत्र एवं वार्षिक विवरणी दायर नहीं किया है उसकी पहचान चूककर्ता कंपनी के रूप में की गई है। ऐसी कंपनियों के निदेशकों को तब तक के लिए जब तक कि वे अपनी गलती का सुधार न कर ले किसी भी प्रकार के दस्तावेज दायर करने के अयोग्य ठहराया जाता है। ऐसी चूककर्ता कंपनियां एफटीई के तहत आवेदन कर सकती हैं।
इस योजना में अन्य बातों के अतिरिक्त वे कंपनियां शामिल नहीं है जो आगे दिए गए सूची में से हो: सूचीबद्ध कंपनियां, कंपनियां जिन्हें सूचीकरण समझौते या किसी अन्य विधि के अनुपालन न करने के लिए असूचीबद्ध कर दिया गया है, धारा 25 कंपनियां, लुप्त कंपनियां, जांचाधीन कंपनियां, वैसी कंपनियां जिनके विरूद्ध न्यायालय में असमाधेय अपराध हेतु अभियोजन चल रहा हो, वैसी कंपनियां जिनके पास बड़ी मात्रा में जमा हो या प्रतिभूति ऋण या बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों या किसी अन्य सरकारी विभाग आदि को देय हो या जिनमें प्रबंधकीय विवाद हो या कंपनियां जिनके संबंध में न्यायालय या सीएलबी या केन्द्र सरकार या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा दस्तावेज दायर करने पर रोक लगाई गई हो।
एमसीए के वेबसाइटwww.mca.gov.in पर उपलब्ध सामान्य परिपत्र संख्या-36/2011 दिनांक 07.06.2011 का संदर्भ लें।
एमसीए के वेबसाइटwww.mca.gov.in पर उपलब्ध सामान्य परिपत्र संख्या-36/2011 दिनांक 07.06.2011 का संदर्भ लें।
रजिस्टर से नाम हटाने की इच्छुक कंपनी विहित फार्म एफटीई में रजिस्ट्रार के पास ऑनलाइन आवेदन कर सकती है। फार्म के साथ पेशारत चार्टर्ड अकाउंटेंट या कंपनी के लेखापरीक्षक द्वारा विधिवत रूप से प्रमाणित शपथ-पत्र, क्षतिपूर्ति बांड लेखा विवरण तथा फार्म दायर करने हेतु प्राधिकृत करने से संबंधित बोर्ड के संकल्प की प्रति भी लगाई जाएं।
हां, आवेदक को विहित फार्म एफटीई में आवेदन के साथ 5000/- रुपए का विहित शुल्क भी जमा करना अपेक्षित है।
- • यदि एमसीए-21 प्रणाली में कंपनी का सक्रिय हस्ताक्षरकर्ता विद्यमान है तो फार्म को कंपनी के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा डिजीटल रूप में हस्ताक्षरित होना अनिवार्य है।
- • यदि एमसीए-21 प्रणाली में ऐसा कोई सक्रिय हस्ताक्षरकर्ता विद्यमान नहीं है तो विहित रूप से भरे गए फार्म की भौतिक प्रति पर कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा प्राधिकृत निदेशक को हस्ताक्षर करना होगा एवं इसे फार्म के साथ संलग्न करना होगा। ऐसा फार्म पेशारत व्यावसायिक (जैसे सीए/सीएस/सीडब्ल्यूए) जिसने फार्म का प्रमाणित किया है, द्वारा अपलोड किया जाएगा।
सभी मामलों में पेशारत व्यावसायिक (जैसे सीए/सीएस/सीडब्ल्यूए) का प्रमाण-पत्र आवश्यक है।
यदि लंबित अभियोजन अधिनियम की धारा 159 के अधीन वार्षिक विवरणी दायर न करने एवं धारा 220 के अधीन तुलन-पत्र न दायर करने के लिए ही है तो ऐसे आवेदन को इस शर्त के साथ स्वीकार किया जा सकता है कि आवेदकों ने संयोजित आवेदन पहले ही दायर किया हो। तथापि, कंपनी के नाम को अंतिम रूप से हटाने का कदम तभी उठाया जाएगा जब सक्षम प्राधिकारी द्वारा संयोजित आवेदन का निपटान हो जाए।
देशी नागरिक एवं अप्रवासी भारतीय अपने संबंधित राष्ट्र की विधि के अनुसार अपने क्षतिपूर्ति बांड एवं शपथ-पत्र को अभिप्रमाणित करा सकते है।
एफटीई के तहत किए गए आवेदनों की सूची वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी अंशधारक को किसी कंपनी का नाम हटाए जाने पर कोई आपत्ति है तो वह कंपनी द्वारा एफटीई फार्म जमा करने की तिथि के 30 दिनों के भीतर संबंधित कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय के पास अपनी आपत्ति दर्ज कर सकता है।