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दिनांक: 14.12.2010 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित "भारत कारपोरेट सप्ताह-2010" में माननीय कारपोरेट कार्य मंत्री द्वारा दिया गया भाषण ।




आज हम सब साथ मिलकर तय की गई दूरी का जश्न मनाने एवं भविष्य की तैयारी करने के लिए एकत्र हुए हैं। भारत के विकास की कहानी, को अगर मैं महान भारतीय ओरकेस्ट्रा के उद्यमों की सिम्फनी के रूप में परिभाषित करता हूं तो उसके संचालक हमारे माननीय प्रधानमंत्री, डॉ. मनमोहन सिंह हैं। प्रत्येक बहुविध कलाकार जिन्होंने इसमें अपना स्वर दिया है वे हमारी प्रशंसा के पात्र हैं, परंतु सर्वाधिक प्रशंसा के पात्र स्वयं प्रधानमंत्री जी हैं। आप लोगों को एकाध स्वर बेसुरा सुनाई दिया होगा, परंतु संगीत के ये सत्र उन बड़े कार्यक्रमों की तैयारी के लिए हैं जो भविष्य में आयोजित किए जाने वाले हैं।

पिछले वर्ष हमने कारपोरेट गवर्नेंस एवं कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व से संबंधित स्वैच्छिक दिशा-निर्देश जारी किए थे। कुछ ही महीनों में यह दिशा-निर्देश बड़ी संख्या में भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में कारपोरेट के लिए रोल-मॉडल एवं चर्चा के मुख्य विषय बन गये हैं। हमने स्वैच्छिक दिशा-निर्देश की क्षमता एवं प्रपत्र से संबंधित प्रतिक्रिया के लिए पणधारकों एवं स्वैच्छिक क्षेत्र को नियुक्त किया है तथा भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थान के योग्य कार्यालयों के अत्यधिक प्रयासों के बाद स्वैच्छिक दिशा-निर्देश के अद्यतन ड्राफ्ट का रूपांतरण तैयार किया गया है जिसे पणधारकों के साथ और अधिक विस्तृत विचार-विमर्श के लिए उनके वेबसाइट पर शीघ्र ही डाल दिया जाएगा।

अनिवार्यत: ये कदम प्रबुद्ध उपक्रमों के न्यायसंगत विकास में सरकार के साथ इच्छुक भागीदारों को लाने के लिए उठाए जा रहे हैं। जब लोग यह कहते हैं कि भारत के दो रूप हैं तो हम उन दो रूपों को उद्देश्य, प्रयास एवं उपलब्धि की सुप्रभावकारी एकता में बांधने के लिए कटिबद्ध हैं। शीघ्र ही भारत में एक अद्यतन, प्रयोक्ता अनुकूल कंपनी अधिनियम होगा तथा कई महत्वपूर्ण मंच जैसे, मानेसर के भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थान का नया परिसर, उन लोगों के लिए केन्द्र बिन्दु होगा जो कारपोरेट गवर्नेंस तथा उनसे संबंधित क्षेत्रों के संबंध में जानकारी रखते हैं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते है।

हमें आशा है कि हम इस प्रक्रिया में भारत में विकसित भारतीय प्रकृति के विशेष भारतीय आयाम का प्रभाव वैश्विक मॉडलों पर छोड़ सकेंगे। दो महत्वपूर्ण सांकेतिक कदम जो कारपोरेट भारत द्वारा स्वैच्छिक रूप से उठाये गये हैं और सरकार द्वारा सक्रिय रूप से जिसमें सहयोग दिया जा रहा है, उस मैं 'कॉल ऑफ द कारपोरेट टाइगर' कहता हूं। यद्यपि हमारी लुक ईस्ट पॉलिसी हमें शक्तिशाली एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ जुड़ने में सहयोग प्रदान करती है, साथ ही हम, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के असाधारण प्रतिनिधि बंगाल टाइगर के संरक्षण के लिए भी कटिबद्ध हैं। इसी प्रकार, कारपोरेट भारत का महत्वपूर्ण सैनिकों, वयोवृद्ध सैनिकों तथा उन शहीदों के परिवारों जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए को सहायता प्रदान करना, सच्चे अर्थों में "व्यापार की सुस्थिरता" शब्द को शीर्ष प्राथमिकता प्रदान करने और भारत को 21वीं सदी में एक नई कारपोरेट परंपरा प्रदान करने की ओर एक सांकेतिक एवं मौलिक प्रयास है जिससे विश्व में भारत को एक अहम मुकाम हासिल होगा। नई कारपोरेट परंपरा की संरचना को माननीय प्रधानमंत्री के आर्शिवचन सुदृढ़ और दृढ़-निश्चयी बनाते हैं। हम भाग्य के लिखे से अभिज्ञ होकर अपने मार्ग का चयन कर रहें हैं, किसी शायर के अल्फाज़ यहां सटीक लगते हैं कि "गिरते हैं शह-सवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तुफ्र क्या गिरें जो घुटनों के बल चले।" हमें आशा है कि हम विश्वास और दृढ़-निश्चय के साथ आगे बढ़ेगें और देश की शान और अर्थव्यवस्था की हर मुश्किल को पार करेंगे।

धन्यवाद ।

 

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