"भारत कारपोरेट सप्ताह, 2010 के उद्घाटन समारोह में भाग लेते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह एक सराहनीय प्रयास है जो सरकार, कारपोरेट क्षेत्र एवं व्यावसायिकों को अति महत्वपूर्ण मुद्दों को आपसी विचार-विमर्श हेतु एक साथ लाता है।
प्रथम भारत कारपोरेट सप्ताह "कारपोरेट क्षेत्र एवं समावेशी विकास" विषय पर पिछले दिसंबर में आयोजित किया गया था। मुझे खुशी है कि तब से अब तक पिछले एक वर्ष में कारपोरेट कार्य मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। इनमें से एक विशेष महत्वपूर्ण पहल 3200 सौ से अधिक निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से निवेशक जागरूकता के महत्वपूर्ण क्षेत्र में है। मैं श्री सलमान खुर्शीद, कारपोरेट कार्य मंत्री एवं उनकी टीम को उनके प्रयासों के लिए बधाई देता हूं।
इस वर्ष के भारत कारपोरेट सप्ताह का विषय "सुस्थिर व्यापार"। मुझे बताया गया है कि इस आयोजन के भाग के रूप में पूरे देश में 400 कार्यक्रमों के आयोजन की योजना है जिसमें कारपोरेट शासन, कारपोरेट सामाजिक दायित्व एवं नैतिक व्यवसाय के मुद्दों पर जोर दिया जाएगा। "बेहतर विनियमन द्वारा कारपोरेट विकास" एवं "कारपोरेट क्षेत्र एवं समावेशी विकास" पर विशेष बल दिया जाएगा। ये क्षेत्र हमारी सरकार एवं हमारे समाज द्वारा विकास प्रक्रिया को समावेशी बनाने के महत्व को दर्शाते है एवं साथ ही उद्यम की भावना को प्रोत्साहित करते है।
भारत हमेशा से ही उद्यमों का देश रहा है। आज यह विश्व स्तरीय व्यावसायिकों का देश भी बन गया है। भारतीय कंपनियां विदेशों में रणनीतिक विस्तार कर रही हैं एवं पूरी दुनियां में उनके पहचान बन रही है। वास्तव में हम वैश्विक कारपोरेट जगत में भारतीय राष्ट्रीय कंपनियों का उत्थान देख रहे है। आज निजी क्षेत्र अवसंरचना विकास जो कि हाल के कुछ वर्षों के पहले तक सार्वजनिक क्षेत्र का वैशिष्ठ्य था, सहित हमारी अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान करता है। हाल के वर्षों में, निजी क्षेत्र पीपीपी परियोजनाओं में भी सरकार के साथ सफलतापूर्वक सहयोग कर रहा है। भारतीय कारपोरेट क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का प्रमुख वाहक बन रहा है। अत: यह जो दायित्व लेकर चल रहा है वह अतिमहत्वपूर्ण है।
कारपोरेट कार्य मंत्रालय का कार्य कारपोरेट क्षेत्र द्वारा हमारी राष्ट्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में उपादेय एवं उत्तरदायी रूप से कार्य करने में सहायता करने हेतु समर्थकारी विनियमन संरचना उपलब्ध कराना है। मुझे खुशी है कि मंत्रालय कम अवधि में ही इस कार्य को पूरा करने हेतु कई परियोजनाएं प्रारंभ की है। एमसीए-21 ई-गवर्नेंस योजना के तहत कारपोरेट पंजीकरण को सरल एवं कारगर बनाने से निवेशकों हेतु सुविधा में वृद्धि के साथ-साथ पारदर्शिता की भावना में भी वृद्धि हुई है तथा इसने कारपोरेट क्षेत्र हेतु आद्योपांत सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। प्रतिस्पर्धा आयोग बाजार में प्रतिस्पर्धा की वृद्धि हेतु प्रयासरत है। कंपनी विधि का अद्यतनीकरण, एक नई विधि के तहत सीमित देयता भागीदारी का प्रारंभ किया जाना, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों के साथ समाभिरुपण के प्रयास एवं व्यापक स्तर पर निवेशक शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन, ये सभी सार्थक एवं उपयोगी पहलें हैं। मुझे दुनिया भर से यह पता चला है कि कारपोरेट शासन एवं कारपोरेट सामाजिक दायित्व पर मंत्रालय द्वारा जारी स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों ने वैश्विक स्तर पर रुचितपन्न की है।
इस अवसर पर मैं हमारे देश में कारपोरेट क्षेत्र के विकास हेतु उचित वातावरण उपलब्ध कराने के हमारी सरकार की वचनबद्धता को पुन: दोहराना चाहूंगा। हम निजी व्यवसाय को भय एवं पक्षपात मुक्त समान अवसर उपलब्ध कराना चाहते है। मुझे ज्ञात है कि कारपोरेट क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सरकारी प्राधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा एवं कर अपवंचन तथा धन के अवैध अंतरण को रोकने के लिए फोन टैपिंग के संबंध में प्रदत्त शक्तियों के बारे में कुछ चिंताएं हैं। यद्यपि, जैसी दुनिया में हम जी रहे हैं उसमें यह शक्तियां आवश्यक है, तथापि, उनका प्रयोग स्पष्ट रूप से परिभाषित नियमों, प्रक्रियाओं एवं तंत्रों के तहत तथा पूरी सावधानी से किया जाना चाहिए ताकि उनका दुरुपयोग न हो। हमें तकनीकी माध्यमों से भी इस समस्या के समाधान की खोज करनी चाहिए ताकि दूरभाष पर हुए बातचीत तक सरकार के संस्थागत फ्रेमवर्क के बाहर का कोई तंत्र न पहुंच सके। इस संबंध में विधिक तंत्र वर्तमान है। उन्हें प्रभावी प्रवर्तन हेतु और सशक्त बनाए जाने की जरूरत है। मैंने मंत्रिमंडल सचिव को इन मामलों की जांच कर अगले एक महीने में मंत्रिमंडल को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निदेश दिया है।
व्यवसाय, अपनी परिभाषा के अनुसार ही, लाभदायक होने चाहिए। किन्तु जिस तरह वे प्राकृतिक संपदाओं का उपयोग करते है एवं जिस हद तक वे आम आदमी की आवश्यताओं एवं महत्वाकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील हैं वह भी उनकी अपनी दूरगामी हितों एवं विकास के लिए निर्णायक है। व्यवसाय की सुस्थिरता इस पद के संकुचित अर्थ में आर्थिक सुस्थिरता मात्र नहीं है वरन सामाजिक एवं पर्यावरण की सुस्थिरता भी है। वास्तव में वित्तीय पूंजी हेतु मानवीय, सामाजिक एवं पर्यावरण पूंजी आवश्यक है, ताकि यह इस पद के दूरगामी अर्थ में सार्थक हो सके। ऐसे बाजार गतिविधि जो गरीबों एवं वंचितों के सशक्तिकरण के बिना धन का संचय करता है वह भी नैतिक रूप से अस्वीकार्य है। मुझे पूरा विश्वास है कि अग्रणी व्यवसायी इस तथ्य से अवगत है कि हाल में कुछ कारपोरेट घरानों के व्यवसाय व्यवहार उनके स्पष्ट नैतिक कमियों के कारण आम चर्चा में रहे।
मुझे हर्ष है कि कारपोरेट क्षेत्र ने सुस्थिरता की चुनौती के प्रति सकारात्मक रूख दिखाया है एवं प्रमुख व्यवसाय प्रक्रियाओं में सुस्थिरता का समावेश करने के कुछ भारतीय मॉडल दुनिया में सर्वोत्तम साबित हो रहे हैं। कई भारतीय कंपनियां सुस्थिरता सुनिश्चित करने हेतु अपने कार्यों को स्पष्ट करना प्रारंभ किया है। कंपनियों की बढ़ती हुई संख्या अपनी सुस्थिरता रिपोर्ट निकाल रही है।
भारत के पृष्ट प्रदेशॉ, जहां हमारी अधिकांश जनसंख्या निवास करती है, की अर्थव्यवस्था के साथ कारपोरेट क्षेत्र का बढ़ता सहयोग एक स्वागत योग्य संकेत है। इसने हमारी अर्थव्यवस्था के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच, कृषि एवं निर्माण उद्योगों के बीच एवं विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वृहत कंपनियों एवं लघु एवं मध्यम उद्यमों, सहकारी संस्थाओं एवं नए उद्यमियों के मध्य सहयोग बढ़ रहा है। मुझे यह जानकर खुशी है कि कई कंपनियां नवीन व्यवसाय मॉडल लेकर सामने आ रही है जो ग्रामीण क्षेत्रों में कृषकों की उद्यमता को बढ़ावा दे रही है। ये सभी बातें हमारे विकास को अधिक समावेशी बनाने के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूती प्रदान करते हैं - ऐसा विकास जो सभी क्षेत्रों एवं हमारे समाज के सभी भागों, विशेषकर गरीबों एवं वंचितों को लाभ पहुंचाता है। मैं इस अवसर पर कुछ ऐसे उपायों पर प्रकाश डालना चाहूंगा जिसके माध्यम से आप कारपोरेट रणनीतियों द्वारा सुस्थायित्व सुनिश्चित कर सकते है।
प्रथम, प्रभावी कुशलता विकास द्वारा हमारी जनसंख्या हेतु रोजगार अवसरों को बढ़ाना कारपोरेट रणनीति का केन्द्र बिन्दु होना चाहिए, न कि भर्ती में आने वाली समस्याओं पर कोई अनुबोध। इससे हमारे समाज के कमजोर तबको को अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में शामिल करने में सहायता मिलेगी साथ ही उद्योग जगत को सुप्रशिक्षित कर्मी भी प्राप्त होगें। यद्यपि, शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी, किन्तु सरकार यह कार्य अकेले नहीं कर सकती है। कारपोरेट भारत को हमारे प्रयासों में सक्रिय सहयोग देना होगा। मुझे हर्ष है कि कई कारपोरेट अग्रणियों ने क्षमता निर्माण एवं कौशल विकास के महत्व को समझा है एवं चालू योजनाओं के माध्यम से सरकार एवं राष्ट्रीय कुशलता विकास निगम के साथ कार्य कर रहे है। कुछ उद्योग संगठनों ने हमारे आईटीआई संस्थानों को सुधारने एवं युवाओं, विशेषकर उन युवाओं के जो गरीब और उपेक्षित है, के कौशल विकास ने हमारे साथ सहयोग करने का प्रस्ताव किया है। किन्तु ये प्रयास इतने अधिक नहीं है कि उनका हमारा देश में उत्पादन प्रक्रियाओं पर कोई स्पष्ट प्रभाव दिखाई दें।
द्वितीय, परियोजनाओं द्वारा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास एवं यह सुनिश्चित करना कि पर्यावरण के अपकर्ष से जीविका के साधनों पर कोई विपरीत प्रभाव न हो, ये महत्वपूर्ण मुद्दे है जिन्हें हमारे कारपोरेट उद्यमों को निपटाना है। औद्योगीकरण एवं विकास में विश्वास की कमी से हमारे विकास प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। ऐसी नीतियां एवं मध्यस्थ संस्थाएं बनाई जानी चाहिए जो जीविका पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करें। ऐसी व्यवस्था हो कि प्रभावित लोगों को वैकल्पिक जीवन शैली में अपना हित नजर आएं। लंबी अवधि के लाभ लोगों को होने वाले तत्कालिक क्षति से अधिक हो। कंपनियों को पर्यावरण हितैषी तरीके अपनाने चाहिए एवं ऐसे सार्ट-कट नहीं अपनाने चाहिए जो जीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हो एवं प्रभावित स्थानीय लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हो। कचरा प्रबंधन, निवास स्थलों का संरक्षण एवं ऊर्जा के कुशल प्रयोग के क्षेत्र में सफलता के कई उदाहरण हमारे समक्ष है। इन्हें पर्याप्त रूप से प्रचारित एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
और अंत में, नैतिक एवं उत्तरदायी व्यवहार कारपोरेट व्यवहार के साथ-साथ हमारे राष्ट्रीय विचारधारा का मुख्य बिन्दु होना चाहिए। नैतिकता आर्थिक सामाजिक एवं मानवीय कार्यों की एक वृहत संकल्पना है जिसमें ग्राहक, श्रमिक, समाज एवं सरकार शामिल है। महात्मा गांधी बार-बार अच्छे लक्ष्य के महत्व पर ही नहीं वरन उन्हें प्राप्त करने हेतु उचित तरीकों के प्रयोग पर जोर देते थे। यह वृहत कंपनियों का दायित्व है कि वे इस संबंध में अग्रणी भूमिका निभाएं। बाकी कारपोरेट क्षेत्र स्वत: ही इसका अनुसरण करने लगेगा जब यह राष्ट्रीय व्यवहार बन जाएगा।
हमारी कारपोरेट संस्कृति को विश्व स्तर पर स्वीकृत अच्छे शासन के मूल्यों - उत्तरदायित्व, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अंशधारकों के प्रति संवेदनशील - को स्वीकार करना चाहिए। हमारे कारपोरेट प्रयास पर्यावरण तंत्र की जरूरतों एवं भारतीय लोकतंत्र की अपेक्षाओं के अनुकूल हों। पिछले दो दशकों के आर्थिक सुधारों ने कई नए अवसरों के द्वारा खोल दिए है। किन्तु जैसे अति नियंत्रण से उद्यम के पहल हतोत्साहित होते है; गैर-विनियमन के अतिवादी मॉडलों के प्रति हठ धर्मिता भी सुस्थायी विकास में रुकावटें पैदा कर सकती है। हमें मध्य मार्ग अपनाना है। हम मानते है कि हमें कारपोरेट भारत में विश्वास होना चाहिए, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार कारपोरेट भारत को सरकार में विश्वास होना चाहिए।
कारपोरेट सामाजिक दायित्व एवं सुस्थिर व्यापार जैसी आधुनिक संकल्पनाएं विकसित अर्थव्यवस्थाओं से उधार नहीं ली गई है, वरन हमारे समृद्ध नैतिक परंपराओं द्वारा सदियों में विकसित हुई है। वास्तव में अब यह हमारा दायित्व है कि हम पूरी दुनिया में उत्पन्न हो रहे नए विचारों पर भारत की विशिष्ट छाप छोड़े। भारत जैसे-जैसे आर्थिक समृद्धि एवं विकास की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है, मुझे विश्वास है कि कारपोरेट भारत आम आदमी के सपनों को पूरा करने में हमारे प्रयासों में सहयोग करेगा। आइयें हम आज फिर इस राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति अपने को पुन: समर्पित करें।
इन शब्दों के साथ ही मैं आपके प्रयासों में पूर्ण सफलता की कामना करता हूं। ईश्वर आप को उचित रास्ता दिखाएं।"
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