श्री आर. बंद्योपाध्याय, सचिव कारपोरेट कार्य मंत्रालय का "भारत कारपोरेट सप्ताह-2010" दिनांक 14-12-2010, विज्ञान भवन, नई दिल्ली के उद्घाटन समारोह में भाषण
माननीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, माननीय कारपोरेट कार्य मंत्री श्री सलमान खुर्शीद, श्री हरी एस. भरतियां, अध्यक्ष, सीआईआई; श्री दिलीप मोदी, अध्यक्ष, एसोचैम; श्री ओंकार एस. कवर; पूर्व अध्यक्ष, फिक्की; श्री चन्द्र जीत बनर्जी, सदस्य संयोजक; ट्रस्टी बोर्ड, राष्ट्रीय कारपोरेट शासन फाउंडेशन; कारपोरेट क्षेत्र के गणमान्य सदस्य, व्यावसायिक निकायों के सदस्य, राजनयिक संस्थाओं के सदस्य, मीडिया के मेरे बंधुओं एवं देवियों एवं सज्जनों; -
सुप्रभात, आपका स्वागत हैं।
दिसंबर, 2009 में प्रथम भारत कारपोरेट सप्ताह के आयोजन एवं पिछले वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था के अच्छे निष्पादन के पश्चात आज कारपोरेट भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, जब कारपोरेट क्षेत्र एवं व्यावसायिकों के प्रतिनिधि यहां द्वितीय भारत कारपोरेट सप्ताह के उद्घाटन में भाग लेने एवं माननीय प्रधानमंत्री को सुनने के लिए एकत्रित हुए हैं।
21 दिसंबर, 2009 को भारत कारपोरेट सप्ताह-2009 के समापन सत्र में मंत्रालय ने विज्ञान भवन के इसी हॉल में महामहिम राष्ट्रपति की उपस्थिति में बड़ी संख्या अंशधारकों से परामर्श के पश्चात दो स्वैच्छिक दिशा-निर्देश जारी किए थे, नामतः; (i) कारपोरेट शासन हेतु स्वैच्छिक दिशा-निर्देश एवं (ii) कारपोरेट सामाजिक दायित्व हेतु स्वैच्छिक दिशा-निर्देश। इन दो दिशा-निर्देशों ने भारत एवं विदेश दोनों में कारपोरेट, व्यवसायी एवं बौद्धिक क्षेत्र में बहुत रुचि उत्पन्न की है।
इन दिशा-निर्देशों में शामिल विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करने हेतु मंत्रालय में प्रतिनिधि मंडल आए एवं मंत्रालय को बड़ी संख्या में राष्ट्रों एवं अंतर्राष्ट्रीय निकायों जैसे ओईसीडी, विश्व बैंक, जीआरआई, आईएफएसी से आमंत्रण भी प्राप्त हुआ है।
माननीय प्रधानमंत्री के सामान्य मार्ग निर्देशन में एवं माननीय कारपोरेट कार्य मंत्री के संरक्षण में इस मंत्रालय ने दो उद्देश्यों को कारपोरेट विकास की रणनीति बनाया है; i) सुविचारित विनियमों द्वारा कारपोरेट विकास एवं ii) समावेशी विकास के साथ कारपोरेट क्षेत्र। भारत एक तीव्र विकासशील देश है एवं मंत्रालय यह महसूस करता है कि किसी अधिनियम, नियम, विनियम का संशोधन करते समय हमें अंशधारकों की वृहत संख्या से विचार-विमर्श करना चाहिए ताकि हमारे निर्णय देश की अर्थव्यवस्था के तेजी से आगे बढ़ते इस क्षेत्र के विकास में कोई बाधा उत्पन्न न करे।
इसी प्रकार, हम अधिक से अधिक कंपनियों को विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को पूंजी बाजार में सूचीबद्ध करवाकर एवं सामान्य और अधिक शिक्षित कर पूंजी बाजार को और मजबूत करना चाहते है। हमारा दर्शन है "सुशिक्षित निवेशक - कारपोरेट भारत की शान"। पिछले वर्ष मंत्रालय ने 300 निवेशक शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए थे एवं इस वर्ष के प्रारंभ में ही हमने इस वर्ष के लिए तीन हजार कार्यक्रमों का लक्ष्य रखा है जो कि दस गुणा वृद्धि है। 18 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर के संगठनों जैसे भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी, एनएसई, बीएसई, एमसीएक्स एक्सचेंज के साथ-साथ व्यापार एवं वाणिज्य निकाय, स्वैच्छिक एवं व्यावसायिक संस्थानों के साथ हमने मंत्रालय का प्रोग्राम बनाया है, जिसके बारे में लोगों में अधिक जानकारी नहीं है, एक राष्ट्रीय स्तर का प्रोग्राम और इसे पूरे देश में फैलाया है।
महाशय, कल तक 3514 कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके थे एवं अभी भी साढ़े तीन महीने का समय बाकी है। अधिक स्थायी आधार पर, हमने एक सूचनाकारी पुस्तिका प्रकाशित की है जिसका नाम है "पूंजी बाजार के नव-निवेशकों की मार्ग-निर्देशिका" एवं इसे सभी क्षेत्रीय भाषाओं में अनुदित करवाया है। हमने एक निवेशक शिक्षा वेबसाइट भी बनाया है - www.iepf.gov.in। इस वेबसाइट का कुल 11 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रयोक्ता हितैषी प्रारूप में राष्ट्रीय शुभारंभ आज ही यहां माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।
हाल के वर्षों में कारपोरेट कार्य मंत्रालय ने एमसीए-21 ई-गवर्नेंस पोर्टल के माध्यम से विवरणियां फाइल करने एवं ई-पंजीकरण को अधिक प्रभावी एवं प्रयोक्ता हितैषी बनाया है। हमने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग एवं प्रतिस्पर्धा अपीलीय ट्रिब्यूनल का कार्य भी प्रारंभ किया है। नए कंपनी बिल हेतु संसद की स्थायी समिति की जांच भी पूरी हो गई है एवं हमें उम्मीद है कि यह आगामी बजट सत्र में एक विधि बन जाएगा।
चार्टर्ड अकाउंटेंट, लागत लेखाकार एवं कंपनी सचिव जैसे हमारे व्यावसायिक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी से कम नहीं है। तथापि, हमारे व्यावसायिक फर्म वैश्विक नहीं बन सके है यद्यपि, हमारे कुछ औद्योगिक उद्यम वास्तविक अर्थों में बहुराष्ट्रीय कंपनियां बन गई है। मंत्रालय ने सीमित देयता भागीदारी अधिनियम बनाया है ताकि व्यावसायिक संस्थान इसका लाभ ले सके एवं निकट भविष्य में वैश्विक आकार ले सकें।
महोदय, आपके मार्ग-निर्देशन एवं संरक्षण में भारत जी-20 का एक सदस्य बन गया है। पूरा कारपोरेट क्षेत्र एवं विभिन्न अन्य संगठनों के उपस्थित सदस्य के साथ-साथ कारपोरेट कार्य मंत्रालय इस उपलब्धि का हिस्सा महसूस करता है। अत: हमने इस वर्ष 'भारत कारपोरेट सप्ताह-2010' का मुख्य विषय "21वीं सदी में सुस्थिर व्यापार" रखने का निर्णय लिया है। सर्वोच्च स्तर के सभी व्यापार एवं वाणिज्य निकाय जैसे सीआईआई, एसोचैम, फिक्की, पीएचडी चैम्बर सभी व्यावसायिक संगठन तथा कई अन्य क्षेत्रीय एवं राज्य स्तर के निकायों के सक्रिय सहयोग से इस सप्ताह के दौरान सुस्थिर व्यापार से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर 400 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आज का यह उद्घाटन समारोह, देवियों एवं सज्जनों वह मौका है जब संपूर्ण कारपोरेट भारत मंत्रालय के साथ खड़े होकर देश के विकास के लिए एकता प्रदर्शित कर रहा है एवं हमारे विचारक प्रधानमंत्री को सुनने एवं अधिक सुस्थायी तरीके से हमारे विकास प्रयासों को उनके मार्ग-निर्देशन में और अधिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए एकत्रित हुआ है। संपूर्ण कारपोरेट क्षेत्र एवं मंत्रालय की तरफ से मैं हमारे प्रिय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का फूलों के गुलदस्तें से स्वागत करता हूं।
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